केरल का वायरल वीडियो, एक बेगुनाह की मौत और सोशल मीडिया न्याय का भयावह चेहरा

केरल में वायरल वीडियो ने एक निर्दोष पुरुष की जान ले ली और सोशल मीडिया ट्रायल की खतरनाक सच्चाई उजागर की। इस घटना ने महिला सुरक्षा, झूठे आरोप और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े किए। जानें कैसे वायरल वीडियो ने इंसानियत और न्याय को दांव पर लगा दिया।

अजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

केरल में सामने आई यह घटना सिर्फ एक बस यात्रा, एक मोबाइल वीडियो या एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं है। यह मामला उस दौर की सच्चाई उजागर करता है, जहां कुछ सेकंड का वीडियो किसी इंसान की पूरी जिंदगी पर भारी पड़ जाता है। 16 जनवरी 2026 को कोझीकोड से पय्यानुर जा रही एक भीड़भाड़ वाली निजी बस में जो हुआ, उसने न केवल 41 वर्षीय दीपक यू की जान ले ली, बल्कि महिला सुरक्षा, झूठे आरोप, सोशल मीडिया ट्रायल और मानसिक स्वास्थ्य जैसे कई गंभीर सवालों को एक साथ खड़ा कर दिया।उस दिन बस में सामान्य से ज्यादा भीड़ थी। केरल राज्य परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, कार्यदिवसों में लंबी दूरी की निजी बसों में औसतन 35 से 45 प्रतिशत तक अतिरिक्त यात्री सफर करते हैं। खासतौर पर सुबह और शाम के समय यात्रियों का एक-दूसरे से सटना आम बात है। इसी भीड़ में 35 वर्षीय शिमजिथा मुस्तफा भी सफर कर रही थीं। वे सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर हैं और पहले पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। उन्होंने बस में खड़े-खड़े मोबाइल कैमरा ऑन किया और सामने खड़े दीपक यू को रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया।

वीडियो में शिमजिथा का दावा था कि दीपक उन्हें बार-बार अनुचित तरीके से छू रहे हैं। उन्होंने इसे हादसा या गलतफहमी मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह जानबूझकर किया गया व्यवहार है। वीडियो के फ्रेम बताते हैं कि दीपक का एक हाथ ऊपर है, जैसा भीड़ में संतुलन बनाने के लिए अक्सर होता है। बस हिल रही है, आसपास कई यात्री खड़े हैं और सभी एक-दूसरे से सटे हुए हैं। इसके बावजूद वीडियो को इस तरह पेश किया गया, मानो एक गंभीर अपराध कैमरे में कैद हो गया हो। इस 26 सेकंड के वीडियो को पोस्ट करते समय शिमजिथा ने खुद इसे ज्यादा से ज्यादा वायरल करने की अपील की। नतीजा यह हुआ कि 24 से 48 घंटे के भीतर वीडियो इंस्टाग्राम और फेसबुक पर आग की तरह फैल गया। सोशल मीडिया ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म्स के अनुसार, यह वीडियो दो दिनों में करीब 20 लाख बार देखा गया। भारत में औसतन किसी भी वीडियो को वायरल कहलाने के लिए 1 से 2 लाख व्यूज काफी माने जाते हैं, ऐसे में 20 लाख व्यूज यह दिखाते हैं कि आरोप और भावनात्मक भाषा कितनी तेजी से लोगों का ध्यान खींचती है।

बाद में शिमजिथा ने करीब ढाई मिनट का एक और वीडियो जारी कर सफाई दी कि उनका उद्देश्य व्यूज लेना नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता फैलाना था। उनका कहना था कि वे चाहती थीं कि समाज ऐसे व्यवहार पर सवाल उठाए और शर्मिंदगी के जरिए बदलाव आए। लेकिन सोशल मीडिया की दुनिया में न मंशा देखी जाती है, न संदर्भ। वहां सिर्फ वीडियो चलता है और फैसला सुनाया जाता है।इसी फैसले की चपेट में आए दीपक यू। 41 वर्षीय दीपक एक टेक्सटाइल कंपनी में सेल्स मैनेजर थे। वे गोविंदपुरम में अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ रहते थे और परिवार का इकलौता सहारा थे। दोस्तों और सहकर्मियों के मुताबिक, उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। वे न शराब पीते थे, न सिगरेट, और काम के बाद सीधे घर लौटते थे। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने उनकी पहचान को पल भर में बदल दिया। वे अब एक मेहनती कर्मचारी या बेटे नहीं, बल्कि “छेड़छाड़ करने वाले” के रूप में देखे जाने लगे।

सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग की रफ्तार इतनी तेज थी कि दीपक को अपनी सफाई रखने का मौका तक नहीं मिला। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि भारत में आत्महत्या करने वालों में करीब 72 प्रतिशत पुरुष होते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि पुरुषों में आत्महत्या का एक बड़ा कारण सामाजिक अपमान और सार्वजनिक बदनामी है। दीपक के साथ भी यही हुआ। परिवार के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि इस अपमान के बाद उनके लिए जीने का कोई मतलब नहीं बचा है।18 जनवरी 2026 को दीपक यू ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह खबर सामने आते ही केरल में हड़कंप मच गया। बाद में जब बस का सीसीटीवी फुटेज सामने आया और अन्य यात्रियों के बयान लिए गए, तो जांच में यह सामने आया कि बस में हुआ संपर्क भीड़ और हालात की वजह से था। किसी भी तरह की जानबूझकर की गई हरकत के पुख्ता सबूत नहीं मिले। लेकिन यह सच्चाई दीपक को वापस नहीं ला सकी।

दीपक की मौत के बाद गुस्सा सड़कों पर उतर आया। केरल के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। पुलिस स्टेशनों के बाहर नारे लगाए गए। सोशल मीडिया पर #JusticeForDeepak ट्रेंड करने लगा। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या अब किसी पर आरोप लगाने के लिए सिर्फ मोबाइल कैमरा ही काफी है। दीपक की मां कन्यका ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और कहा कि उनके बेटे को झूठे आरोपों और सोशल मीडिया ट्रायल ने मार डाला।पुलिस ने शिमजिथा मुस्तफा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया। उन्हें गिरफ्तार कर 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि शिमजिथा ने बस में एक नहीं, बल्कि कई वीडियो रिकॉर्ड किए थे। उनके मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वीडियो में एडिटिंग या संदर्भ से छेड़छाड़ तो नहीं की गई। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिए।

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर असर महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे पर पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 4 लाख महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज होती हैं। इनमें से बड़ी संख्या सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी होती है। सोशल मीडिया कई मामलों में पीड़ित महिलाओं के लिए आवाज बना है, लेकिन केरल की इस घटना ने उस भरोसे को कमजोर कर दिया है। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के मामलों से असली पीड़ित महिलाओं की बातों पर भी शक किया जाने लगेगा।घटना के बाद विरोध के अजीब तरीके भी सामने आए। कुछ लोग बसों में आर्म गार्ड पहनकर सफर करते दिखे, ताकि किसी अनजाने स्पर्श पर आरोप न लगे। कुछ ने व्यंग्य में कहा कि अब हर यात्री कैमरा लेकर चलेगा। यह मजाक नहीं, बल्कि उस डर की झलक है जो आम लोगों के मन में बैठ गया है।केरल की यह घटना बताती है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल जितना ताकतवर है, उतना ही खतरनाक भी। महिला सुरक्षा बेहद जरूरी मुद्दा है, लेकिन उसका हल कानून और जांच से निकलता है, न कि वायरल वीडियो से। दीपक यू की मौत एक परिवार की तबाही है और समाज के लिए चेतावनी भी। सवाल यह है कि क्या हम इस चेतावनी को समझेंगे, या फिर अगला वीडियो, अगली जिंदगी और अगला मातम हमारा इंतजार कर रहा है।

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