राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने शुरू किया मनरेगा बचाओ 45 दिन राष्ट्रीय संघर्ष
राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ राष्ट्रीय अभियान शुरू किया। मजदूरों और ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा, VB‑G RAM G कानून के खिलाफ विरोध, गांव-गांव चौपाल, पदयात्रा और जनसंपर्क के जरिए गरीबों के हक और आजीविका की लड़ाई को जोर दिया जा रहा है।


कांग्रेस ने देशभर में ग्रामीण रोजगार और गरीबों के अधिकार की रक्षा के लिए कमर कस ली है। राहुल गांधी ने खुद मैदान में उतरकर अभियान की शुरुआत की। सिर पर पगड़ी, हाथ में कुदाल लेकर वे मजदूरों के बीच पहुंचे और मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उनका कहना था कि नया VB‑G RAM G कानून जुमला है और गरीबों के हक पर हमला है। इस दौरान पूरे देश से आए मजदूरों की मिट्टी को पौधों में डालकर एकजुटता का संदेश दिया गया। यह दृश्य जवाहर भवन में आयोजित मनरेगा बचाओ मोर्चा का था, जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी कुदाल थामे खड़े थे। खड़गे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा को खत्म करके महात्मा गांधी के नाम को लोगों की यादों से मिटाने की कोशिश कर रही है। अब यह अभियान सिर्फ बातें करने तक सीमित नहीं है। कांग्रेस ने 10 जनवरी से 25 फरवरी 2026 तक 45 दिनों का मनरेगा बचाओ संग्राम चलाने की घोषणा की है। इसमें गांव-गांव पदयात्रा, धरना, जनसंपर्क अभियान और विधानसभा घेराव शामिल हैं। पार्टी का कहना है कि मोदी सरकार ने मनरेगा को कमजोर करके करोड़ों गरीबों के पेट पर लात मारी है।
मनरेगा की कहानी 2005 से शुरू होती है, जब यूपीए सरकार ने इसे लॉन्च किया। इसका मकसद ग्रामीण इलाकों में गरीबों को 100 दिनों की रोजगार गारंटी देना था। पिछले 17 वर्षों में यह योजना करोड़ों परिवारों के लिए जीवन का आधार बन गई। आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में मनरेगा के तहत 2.5 करोड़ से अधिक परिवारों को रोजगार मिला और 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान हुआ।लेकिन अब मोदी सरकार ने इसे बदलकर VB‑G RAM G (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) बना दिया। नया कानून दिसंबर 2025 में पास हुआ, जिसमें रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 किया गया। इसके साथ ही साप्ताहिक भुगतान और आजीविका से जोड़ने की व्यवस्था लागू की गई। सरकार का दावा है कि यह बदलाव भ्रष्टाचार को रोकेगा और गांवों को आत्मनिर्भर बनाएगा। लेकिन कांग्रेस इसे गरीब विरोधी कदम मान रही है। राहुल गांधी कहते हैं कि नया कानून काम के अधिकार को छीनता है और पंचायतों की ताकत कम करता है। पहले मजदूरों को मिलने वाला पैसा अब ठेकेदारों और अफसरों की जेब में जाएगा।
राहुल गांधी की रायबरेली यात्रा ने इस मुहिम को नई गति दी। 20 जनवरी 2026 को वे दो दिनों के दौरे पर पहुंचे और मनरेगा बचाओ चौपाल आयोजित की। उन्होंने मजदूरों से कहा कि जब हम सब एक होंगे, तो मोदी को पीछे हटना पड़ेगा। यह दौरा ऐसे समय हुआ जब कर्नाटक और तमिलनाडु विधानसभाओं में VB‑G RAM G के खिलाफ प्रस्ताव पास हुए। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल के अभिभाषण में इसका विरोध पढ़ने से इनकार किया और सदन से चले गए।कांग्रेस को लगता है कि मनरेगा में SIR जैसा पोटेंशियल है, जो बिहार चुनाव में नहीं चल पाया था, लेकिन यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव के लिए इसे प्रमुख मुद्दा बनाया जा सकता है। पार्टी 2026 में होने वाले कुछ राज्यों के चुनावों में भी इसे भुनाने की कोशिश करेगी, जैसे हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक। हालांकि, केरल में पी. विजयन, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन इस क्रेडिट को कांग्रेस को नहीं देंगे।कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने संसद के बजट सत्र में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने का वादा किया। उनका कहना है कि मनरेगा कांग्रेस सरकार का दिया हुआ कानूनी अधिकार है, जिसे भाजपा खत्म करना चाहती है। आंकड़े बताते हैं कि मनरेगा ने ग्रामीण पलायन रोका और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई। 2023-24 में 55% से ज्यादा काम महिलाओं ने किया और 3 करोड़ से अधिक जॉब कार्ड जारी किए गए।
लेकिन VB‑G RAM G में अब केंद्र सरकार तय करेगी कि कब और किसे काम मिलेगा। इस केंद्रीकरण से राज्य सरकारों पर बोझ बढ़ गया है। राहुल गांधी ने तीन काले कृषि कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि किसानों के आंदोलन से सरकार झुकी। लेकिन क्या मनरेगा पर वैसा ही असर होगा? विशेषज्ञ कहते हैं कि फर्क है। कृषि कानूनों में किसान संगठित थे, जबकि मनरेगा मजदूर बिखरे हुए हैं। कांग्रेस को इन्हें एकजुट करना पड़ेगा।यूपी में कांग्रेस के सहयोगी अखिलेश यादव मनरेगा को अपने पैमाने पर तौलेंगे। SIR विरोध में तेजस्वी यादव को किनारे करने का उदाहरण अखिलेश ने देखा है। झारखंड में JMM के साथ गठबंधन है, लेकिन NDA की ओर उनका सॉफ्ट कॉर्नर चर्चा में है। कांग्रेस की रणनीति साफ है VB‑G RAM G की विसंगतियों पर हमला। नया कानून बिना राज्यों की सहमति ही बोझ डालता है। विपक्षी राज्य इसका विरोध करके बवाल मचा सकते हैं। लेकिन BJP कहेगी कि कांग्रेस मजदूरों के खिलाफ है।राष्ट्रीय मनरेगा श्रमिक सम्मेलन में देशभर से मजदूरों ने अपनी मिट्टी लाई। यह प्रतीकात्मक कदम आंदोलन को राष्ट्रीय स्वरूप देने की कोशिश था। राहुल गांधी ने कहा कि BJP संपत्ति कुछ हाथों में रखना चाहती है ताकि गरीब अडानी-अंबानी पर निर्भर रहें। आंकड़ों से साफ है कि मनरेगा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। 2022-23 में 11 करोड़ से ज्यादा व्यक्ति-दिन काम उत्पन्न हुए और 80,000 करोड़ से अधिक मजदूरी दी गई।
VB‑G RAM G में डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर और बायोमेट्रिक ट्रांसपेरेंसी का वादा है, लेकिन कांग्रेस कहती है कि यह केवल दिखावा है। पुरानी योजना में भ्रष्टाचार था, लेकिन नई योजना में गरीबों के अधिकार छिन जाएंगे।कांग्रेस का इतिहास मनरेगा के पक्ष में मजबूत रहा है। 2009 और 2014 के चुनावों में यह मुद्दा काम आया। अब 2026-27 में इसे फिर चुनावी हथियार बनाने की तैयारी है। लेकिन BJP का जवाब भी तैयार है। उनका कहना है कि VB‑G RAM G से गांव सशक्त होंगे और 125 दिन रोजगार मिलेगा।राहुल गांधी की केरल मेगापंचायत और दिल्ली मोर्चे से स्पष्ट है कि अभियान तेज़ होगा। मजदूरों की हुंकार सरकार को हिला सकती है या नहीं, यह वक्त बताएगा। लेकिन गरीब की लड़ाई में राजनीति अपनी चमक दिखा रही है। कांग्रेस को उम्मीद है कि यह आंदोलन कृषि कानूनों जैसा रंग लाएगा। यूपी, बिहार जैसे राज्यों में जहां मनरेगा का असर ज्यादा है, वहां वोट बैंक हिलेगा। 2024 लोकसभा में कांग्रेस को 99 सीटें मिली थीं, अब मनरेगा से और मजबूती की उम्मीद है।
मनरेगा मजदूरों की कहानियां दिल छूती हैं। एक मजदूर ने बताया कि योजना से घर चला और बच्चे पढ़े। अब VB‑G RAM G से डर है कि काम मिलेगा या नहीं। कांग्रेस इसे भावनात्मक मुद्दा बना रही है। खड़गे ने कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाना अपमान है। पश्चिम बंगाल में ममता ने योजना का नाम महात्मा श्री रखा, जो एक जवाब है। कांग्रेस का 5 जनवरी से अभियान शुरू हुआ, जिसमें शशि थरूर जैसे नेता शामिल हैं।आंकड़े चीखते हैं मनरेगा से 30 करोड़ से ज्यादा जॉब कार्ड, 15 करोड़ परिवार लाभान्वित। VB‑G RAM G में बदलाव अच्छे लगते हैं, लेकिन कांग्रेस कहती है कि यह गरीबों को लूटने की योजना को बंद करने का बहाना है। अंत में, यह लड़ाई केवल कानून की नहीं, बल्कि गरीबों के हक और आजीविका की है। राहुल गांधी का ऐलान साफ है एकजुट होकर लड़ेंगे। सरकार झुकेगी या कांग्रेस को नया झटका मिलेगा, यह राजनीति और जनता की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। मनरेगा बचाओ मुहिम अब राष्ट्रीय स्तर पर फैल रही है, और इसके नतीजे आने वाले महीनों में पूरे देश में दिखाई देंगे।



