बॉर्डर 2 के गाने ‘घर कब आओगे’ पर वरुण धवन की फौजी भूमिका ने मचाई ट्रोलिंग और बहस

बॉर्डर 2 का गाना “घर कब आओगे” रिलीज होते ही वायरल हो गया और वरुण धवन की फौजी की भूमिका पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। ट्रोलिंग और आलोचनाओं के बीच यह फिल्म उनके करियर के लिए चुनौती और देशभक्ति का नया संदेश लेकर आई है।

अजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

2026 में रिलीज़ होने वाली सबसे चर्चित फिल्मों में से एक बॉर्डर 2 ने रिलीज़ से पहले ही दर्शकों के बीच बड़ी चर्चा पैदा कर दी है। फिल्म का पहला गाना “घर कब आओगे” रिलीज़ होते ही वायरल हो गया। गाने में देशभक्ति, भावनात्मक गहराई और फौजियों के जीवन की सच्चाई को दर्शाया गया है, जिसने दर्शकों के दिलों को छू लिया। लेकिन इसके साथ ही सोशल मीडिया पर वरुण धवन की फौजी की भूमिका पर तीखी आलोचना और ट्रोलिंग भी शुरू हो गई। यह बहस उठाती है कि क्या केवल एक गाने या कुछ सेकंड के वीडियो फुटेज के आधार पर किसी कलाकार को जज करना सही है।बॉर्डर 2 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म बॉर्डर की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास है। मूल फिल्म ने भारतीय दर्शकों में युद्ध और वीरता की भावना को मजबूत किया था। सन्नी देओल, सुनील शेट्टी और अक्षय खन्ना के किरदार आज भी वीरता का मानक माने जाते हैं। ऐसे में नई फिल्म में किसी भी अभिनेता का प्रदर्शन हमेशा तुलना के घेरे में आता है। वरुण धवन की ट्रोलिंग का मुख्य कारण यही है कि दर्शक उनकी छवि को हल्के, कॉमिक और रोमांटिक किरदारों से जोड़ चुके हैं।

हालांकि, वरुण ने पहले भी गंभीर और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाए हैं। बदलापुर में उन्होंने बदले की आग में जलते किरदार को प्रभावशाली ढंग से निभाया और अक्टूबर में उनकी खामोश और संवेदनशील अदाकारी ने आलोचकों को प्रभावित किया। इसका मतलब यह है कि एक कलाकार की क्षमता केवल उनकी पिछली छवि तक सीमित नहीं होती। वरुण के पास खुद को बदलने और नई भूमिकाओं में ढलने की क्षमता है और बॉर्डर 2 उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग की प्रवृत्ति आज एक आदत बन चुकी है। किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा होते ही नकारात्मक प्रतिक्रियाएँ और मीम्स तेजी से फैलते हैं। वरुण धवन के ट्रोलिंग का एक और कारण यह भी है कि लोग नए स्टार-किड्स या फैमिली बैकग्राउंड वाले कलाकारों के प्रति पूर्वाग्रह रखते हैं। यह स्थिति साफ दिखाती है कि कई बार दर्शक पुराने अनुभव और फिल्मों की यादों से निर्णय प्रभावित कर लेते हैं।गाने के रिलीज़ होते ही नेटिज़न्स ने वरुण के चेहरे के हाव‑भाव और मुस्कान पर मीम्स और मज़ाक करना शुरू कर दिया। कुछ ने इसे हल्का और गंभीरता से दूर बताते हुए आलोचना की, जबकि कई दर्शक गाने की भावनात्मक गहराई और देशभक्ति की भावना को सराहते हुए सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ अक्सर अतिसंवेदनशील और पूर्वाग्रहपूर्ण हो सकती हैं।

वरुण धवन ने इस ट्रोलिंग का सामना सकारात्मक ढंग से किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर हंसते हुए अपने मीम्स और मज़ाक को स्वीकार किया और इसे दर्शकों के मनोरंजन का हिस्सा माना। उन्होंने लाइव सेशन में मजाकिया अंदाज में कहा कि लोग उनकी मुस्कान पर ध्यान दे रहे हैं और उन्होंने गायक को ही ‘अपनी मुस्कान कैसे रखें’ का ट्यूटोरियल दिया।फिल्म से जुड़े लोग भी इस ट्रोलिंग के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि बिना पूरी फिल्म देखे किसी कलाकार को ट्रोल करना आसान हो गया है और यह एक तरह की विषाक्त संस्कृति बन चुकी है। यह साफ करता है कि कलाकारों की मेहनत और कड़ी ट्रेनिंग को केवल कुछ सेकंड के फुटेज के आधार पर आंकना उचित नहीं है। वरुण धवन एक सम्मानित और वीर अधिकारी का किरदार निभा रहे हैं और उनका न्याय तब तक नहीं किया जा सकता जब तक पूरी फिल्म नहीं देखी जाती।फिल्म की एडवांस बुकिंग के आंकड़े भी दर्शाते हैं कि दर्शकों में उत्साह बरकरार है। पहले 24 घंटों में 50,000 से अधिक टिकट बिक चुके हैं। यह संकेत है कि आम जनता फिल्म को देखने के लिए उतनी ही उत्साहित है जितनी कि ट्रोलिंग की बहस तेज़ है।बॉर्डर 2 की यह बहस केवल वरुण धवन तक सीमित नहीं है। यह सवाल है कि क्या हम बिना पूरी फिल्म देखे, सिर्फ कुछ सेकंड के फुटेज पर किसी कलाकार को जज करने की आदत में आ चुके हैं। आज के डिजिटल युग में यह जल्दी निर्णय लेना सामान्य हो गया है। यह स्थिति दर्शकों और फिल्म उद्योग दोनों के लिए चुनौती पेश करती है।

फिल्म निर्माता और कलाकार मानते हैं कि दर्शकों को पूरी फिल्म देखने और कहानी को समझने के बाद ही निष्कर्ष निकालना चाहिए। कलाकारों को रचनात्मक स्वतंत्रता और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को निभाने का अवसर मिलना चाहिए। वरुण धवन के लिए बॉर्डर 2 न केवल उनकी छवि बदलने का मौका है, बल्कि यह साबित करने का भी अवसर है कि वह गंभीर और भावपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम हैं।अंततः, “घर कब आओगे” गाने की वायरल प्रतिक्रिया ने दर्शकों में भावनात्मक जुड़ाव और सोशल मीडिया पर बहस दोनों पैदा कर दी हैं। यह साफ है कि केवल एक गाने के आधार पर किसी कलाकार को ट्रोल करना या उनकी मेहनत और क्षमता को नकारना निष्पक्ष नहीं है। जब बॉर्डर 2 पूरी तरह रिलीज़ होगी, तब ही दर्शकों और आलोचकों का अंतिम फैसला सामने आएगा, और यह स्पष्ट होगा कि वरुण धवन ने फौजी की भूमिका में अपने अभिनय का लोहा मनवाया या नहीं।आज यह बहस हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि सोशल मीडिया पर तुरंत निर्णय लेना, कलाकारों की मेहनत को तिरछा देखना और पूर्वाग्रह से जज करना किस हद तक उचित है। बॉर्डर 2 का असली परीक्षण फिल्म रिलीज़ के बाद ही होगा, और तब ही साबित होगा कि एक गाने की आलोचना, कलाकार की पूरी क्षमता को आंकने के लिए पर्याप्त नहीं है।

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